September 23, 2026
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आपके खाने में छिपे खतरे
यह लड़ाई कुछ वर्ग सेंटीमीटर जगह के लिए है. लेकिन इससे तय हो सकता है कि करोड़ों भारतीय क्या खाने का फैसला कैसे करते हैं. हम बात कर रहे हैं खाद्य उत्पादों के ऊपर छपने वाले लेबल की. सुपरमार्केट में रंगीन पैकेटों के सामने हाई प्रोटीन , नो ऐडेड शुगर , मल्टीग्रेन , हार्ट हेल्दी या विटामिन से भरपूर जैसे लुभावने दावे दिखते हैं. लेकिन उत्पाद में चीनी, नमक या सैचुरेटेड फैट की मात्रा आमतौर पर पैकेट के पीछे पोषण तालिका में छोटे और अबूझ लगने वाले शब्दों में लिखी होती है, जिसे ठीक से पढ़-समझ पाना तक मुश्किल होता है. कई अध्ययनों में यह बार-बार सामने आया है कि इनमें किसी भी चीज की ज्यादा मात्रा सेहत के लिए बेहद नुकसानदेह हो सकती है.दर्शकों तक इस व्यवस्था पर बहुत कम ध्यान गया. लेकिन अब इसका बचाव करना मुश्किल हो गया है क्योंकि देश में बीमारियों की तस्वीर चिंताजनक ढंग से बदली है. पैकेटबंद और ज्यादा प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों की खपत बढ़ने के साथ डायबिटीज, मोटापा, हाई ब्लड प्रेशर और दिल की बीमारियां भारी नुकसान पहुंचा रही हैं. इसीलिए पैकेट के ऊपर चेतावनी देने यानी फ्रंट-ऑफ-पैक लेबलिंग (एफओपीएल) का तकनीकी दिखने वाला विवाद सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा. अदालत गैर-लाभकारी संस्था एस एंड आवर हेल्थ सोसाइटी की जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही है. इसमें ज्यादा चीनी, नमक और सैचुरेटेड फैट वाले पैकेटबंद खाद्य पदार्थों पर मोटी चेतावनी देने की मांग की गई है. इससे नियामकों, खाद्य कंपनियों और स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं तक सीमित बहस अचानक राष्ट्रीय मुद्दा बन गई है. क्या भारतीय उपभोक्ताओं को अपने खाने में सेहत के लिए नुकसानदेह सामग्री की ज्यादा मात्रा के बारे में साफ और दो-टूक चेतावनी पाने का अधिकार है? और देश के 140 अरब डॉलर (13.3 लाख करोड़ रु.) के खाद्य प्रसंस्करण उद्योग के साथ इंसाफ करते हुए ऐसी चेतावनी कैसे दी जाए? सेहत की चेतावनी भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) को यह श्रेय तो दिया जा सकता है कि उसने भ्रामक विज्ञापनों, झूठे दावों और लेबलिंग नियमों के उल्लंघन को लेकर कई खाद्य कंपनियों को 150 से ज्यादा नोटिस भेजे हैं. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के तहत आने वाले इस नियामक की कार्रवाई के दायरे में नेस्ले, पेप्सिको, कोका-कोला और रेड बुल इंडिया जैसी बड़ी एफएमसीजी कंपनियां शामिल हैं. हाल ही साफ-सफाई के नियमों के उल्लंघन पर सीजी फूड्स इंडिया को भुजिया नमकीन बनाना बंद करने को कहा गया.लेकिन कुछ सामग्रियों के खतरों से उपभोक्ताओं को आगाह करने वाली एफओपीएल पर एफएसएसएआई ने मसौदों और सलाह-मशविरे में कई साल लगा दिए. इस देरी पर सुप्रीम कोर्ट ने नाराजगी जताई. शीर्ष अदालत ने 10 सितंबर की सुनवाई में कहा, "हमें लोगों, खासकर बढ़ते बच्चों की सेहत की चिंता है. सभी को आगे आकर राष्ट्रीय हित में सहयोग करना चाहिए." कोर्ट ने अपने विस्तृत आदेश में एफएसएसएआई और केंद्र से प्रस्तावित एफओपीएल व्यवस्था के कई पहलुओं पर दोबारा विचार करने को कहा है. न्यायमूर्ति जे.बी. पारदीवाला और के. विनोद चौहान की पीठ ने एफएसएसएआई से 13 सीधे सवाल पूछे हैं. अगली सुनवाई 28 सितंबर को रखी गई है.अलग-अलग स्वास्थ्य अध्ययनों के नतीजे इस मामले को और जरूरी बनाते हैं. इनमें भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) समर्थित अध्ययन भी है, जो 2023 में द लैंसेट में प्रकाशित हुआ था. उसके मुताबिक, देश में 10.1 करोड़ लोग डायबिटीज और 13.6 करोड़ लोग प्री-डायबिटीज के साथ जी रहे थे. अध्ययन में मोटापे की दर 28.6 फीसदी और हाई ब्लड प्रेशर की दर 35.5 फीसदी बताई गई. समस्या इतनी बड़ी है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मोटापे और जीवनशैली से जुड़ी
बारूद के ढेर पर बैठी बस्तियां
प्रयागराज और कौशांबी जिले की सीमा पर पिपरी थाना क्षेत्र के महमूदपुर मनेरी गांव में दिल्ली-हावड़ा रेल रूट से सटे मजरा चिल्ला शाहबाजी में इन दिनों दहशत पसरी है. चारों तरफ पुलिस का पहरा है. पेड़ों पर धूल जमी है. टूटे हुए हाईटेंशन लाइन के टावर दूसरी जगह शिफ्ट करने का काम चल रहा है. इसी खंभे के सामने मकानों के मलबे में 60 वर्षीय शेषनारायण और उनकी पत्नी रानी अपनी गृहस्थी का सामान तलाश रहे हैं. इस बुजुर्ग दंपती का मकान 31 अगस्त को धमाके की चपेट में आकर पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया था.दोधर करीब पौने 12 बजे हुआ यह धमाका शेषनारायण के घर के बगल में चल रही अवैध पटाखा फैक्ट्री में विस्फोट से हुआ था. गनीमत थी कि तब शेषनारायण और उनकी पत्नी घर के बाहर खेत में काम कर रहे थे और दोनों बेटे नौकरी पर गए हुए थे. करीब सवा घंटे तक लगातार होते रहे धमाकों की गूंज तीन किलोमीटर तक सुनाई पड़ी. आसपास का इलाका धुएं के गुबार में डूब गया. धुंधलका छंटने तक पटाखा फैक्ट्री के अगल-बगल के चार मकान पूरी तरह जमींदोज हो चुके थे. चपेट में आए 11 लोगों की मौके पर ही मौत हो गई, इनमें से कुछ के चीथड़े तक उड़ गए. धमाके की आवाज सुनकर 15 वर्षीय संजना भी घर की तरफ भागी. वह कुछ सामान खरीदने आई थी. धमाकों और धुएं के बीच वे