September 30, 2026
-
Premium
नया समीकरण
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 12 सितंबर को दिल्ली के भारत मंडपम में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग का गर्मजोशी से हाथ मिलाकर स्वागत किया तो यह सिर्फ कूटनीतिक शिष्टाचार भर नहीं था. 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान दोनों नेता यह परख रहे थे कि क्या भारत और चीन वह रिश्ता बना सकते हैं, जिसे दोनों तरफ के अधिकारी सावधानी से नया समीकरण कहने लगे हैं. करीब सात साल में शी की यह पहली भारत यात्रा थी. यह 2020 में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर चार दशकों से ज्यादा समय के सबसे भयंकर भारत-चीन सीमा टकराव के बाद भी उनका पहला दौरा था. उस घटना ने द्विपक्षीय रिश्तों को गहरा झटका दिया था. सैनिकों के पीछे हटने और राजनैतिक संवाद दोबारा शुरू करने की प्रक्रिया असल में अक्तूबर 2024 में ही शुरू हो गई थी. यह रूस के कजान में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान मोदी और शी की मुलाकात से कुछ दिन पहले हुआ था. अगस्त 2025 में चीन के तियानजिन में शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) शिखर सम्मेलन के दौरान दोनों नेता फिर मिले. उन्होंने कहा कि भारत और चीन "विकास के साझेदार हैं, प्रतिद्वंद्वी नहीं." उसके बाद रिश्तों को सामान्य बनाने की प्रक्रिया और आगे बढ़ी. लिहाजा दिल्ली में उनकी हालिया द्विपक्षीय बैठक को यह तय करने की अहम कोशिश के रूप में देखा जाना चाहिए कि रिश्तों में आई नरमी कैसे कायम रह सकती है. इसके लिए सीमा पर ज्यादा महत्वाकांक्षी व्यवस्थाएं, गहरे आर्थिक संबंध और संपर्क की बहाली जरूरी होगी. ब्रिक्स सम्मेलन से एक पखवाड़े पहले बीजिंग में चुपचाप और सोच-समझकर तैयार की
अपनी अलग राह
अगस्त की 22 तारीख को पुणे के एआइएसएसएमएस कॉलेज ग्राउंड में राहुल गांधी के छात्रों की गूंज कार्यक्रम के चौथे संस्करण में हजारों युवा महिलाएं जुटी थीं. यह कांग्रेस का देशव्यापी छात्र संपर्क अभियान है. नियॉन पीली लिनेन शर्ट पहने राहुल ने महिलाओं की इस सभा को पितृसत्ता पर जोरदार हमले का मंच बना दिया. उन्होंने मनुस्मृति का जिक्र किया, महिला प्रदर्शनकारियों के "अपशब्दों" का इस्तेमाल करने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के "सांस्कृतिक सदमे" को लेकर उन पर निशाना साधा और तालियों से गूंजती भीड़ से कहा, "हमें मिलकर इस पितृसत्ता को खत्म करना है. पितृसत्ता को ध्वस्त कर दो." भाजपा ने तुरंत पलटवार किया. उसे जवाब कहीं दूर नहीं खोजना पड़ा. राहुल की पार्टी ने ही उसे मौका दे दिया. जून में जब कर्नाटक में कांग्रेस सरकार का पुनर्गठन हुआ और सिद्धारमैया की जगह डी. के. शिवकुमार मुख्यमंत्री बने तो उनके नए 33 सदस्यीय मंत्रिमंडल में एक भी महिला को जगह नहीं दी गई. इस महीने की शुरुआत में कर्नाटक कांग्रेस ने 35 जिला अध्यक्षों के नाम का ऐलान किया. उनमें सभी पुरुष थे. यह फासला सिर्फ महिला प्रतिनिधित्व के मुद्दे तक सीमित नहीं है. राहुल गांधी और कांग्रेस के बीच सियासी सोच और दिशा का अंतर लगातार बढ़ता दिख रहा है. पिछले दो वर्षों में राहुल ने बार-बार ऐसे मुद्दे उठाए हैं, जिनका आम वोटरों से सीधा जुड़ाव नजर आता है. साथ ही, भाजपा के नेतृत्व वाली सरकारों के खिलाफ उनका रुख लगातार आक्रामक होता गया है. अग्निवीर और पेपर लीक से लेकर मणिपुर हिंसा, किसानों के लिए एमएसपी, बेरोजगारी, जातिगत जनगणना, राजनेताओं और पूंजीपतियों की मिलीभगत और चीन का खतरा तक वे कई मुद्दे उठा चुके हैं. अब उनका ताजा आरोप है कि मोदी सरकार 2,000 रुपए से अधिक के लेनदेन पर शुल्क लगाने के लिए अमेरिकी टेक दिग्गजों के दबाव के आगे झुक रही है. यूपीआइ (यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस) फिर भी, सियासी बहस की दिशा तय करने की राहुल गांधी की क्षमता कांग्रेस को उसी हिसाब से चुनावी लाभ दिलाने में बार-बार नाकाम रही. 2024 के लोकसभा चुनाव के बाद हुए विधानसभा चुनावों में कांग्रेस कुल 1,686 सीटों में से 924 पर चुनाव लड़ी और सिर्फ 171 सीटें जीत सकी. उसकी जीत की दर करीब 18.5 फीसद रही. जम्मू-कश्मीर और झारखंड में वह विजयी गठबंधनों का हिस्सा रही और केरल में उसने जीत दर्ज की. मगर हरियाणा, महाराष्ट्र, दिल्ली, बिहार और असम में उसे हार मिली. पश्चिम बंगाल में उसे सिर्फ दो सीटें मिलीं और पुडुचेरी में सिर्फ एक. थोड़ी कामयाबी, थोड़ी चूक कई मौकों पर मुद्दा हाथ से निकल जाने के बाद भी राहुल और कांग्रेस उस पर कुछ हद तक सियासी बढ़त हासिल करने में सफल रहे हैं. जुलाई में दिल्ली में छात्रों के प्रदर्शन के बाद, कांग्रेस नेताओं को महसूस हुआ कि युवाओं का आक्रोश पूरी तरह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर केंद्रित है और गृह मंत्री अमित शाह उससे काफी हद तक बच गए, इस बीच, अगस्त के मध्य में राहुल गांधी की टीम को खबर मिली कि 20 जुलाई को पुलिस कार्रवाई के दौरान पेलेट गन से घायल साहिल लोचव नामक एक युवा एम्स में इलाज करा रहा है. राहुल ने तुरंत अपने सहयोगियों से उससे संपर्क करने को कहा. अस्पताल में पुलिस की मौजूदगी के बावजूद लोचव को वहां से 10 जनपथ लाया