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July 15, 2026

अयोध्या का असुंदर कांड

राम मंदिर में आई दान की रकम को मिलकर किस तरह से ठिकाने लगाया गया. मंदिरों के प्रबंधकों-प्रशासकों के पास क्या हो सकते हैं इन धर्मस्थलों की संपत्ति की रक्षा के उपाय

मुश्किल में मोहन

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव के लिए 23 जून किसी आम मंगलवार की तरह ही शुरू हुआ. मंगलवार मंत्रालय में होने वाली साप्ताहिक कैबिनेट बैठक के लिए तय होता है. मनोरम श्यामला हिल्स पर मुख्यमंत्री आवास पर अधिकारी दिन के एजेंडे को अंतिम रूप दे रहे थे, तभी यादव के भरोसेमंद राजनैतिक सहयोगी ने एक सहायक के फोन पर कॉल किया. सहयोगी ने यादव से कहा, मुझे दिल्ली से भाजपा के एक केंद्रीय नेता का फोन आया था. उन्होंने आज के इंडियन एक्सप्रेस में छपी एक रिपोर्ट भेजी है. यह रिपोर्ट उज्जैन और उसके आस-पास आपके और आपके परिजनों की जमीन की मिल्कियत से जुड़ी है. यादव ने पूरी बात सुनकर एक लंबे मौन के बाद फोन रखा.कुछ ही घंटों में उस रिपोर्ट ने यादव के कार्यकाल की सबसे बड़ी राजनैतिक चुनौती खड़ी कर दी. दिसंबर 2023 में पद संभालने के बाद करीब ढाई साल तक मुख्यमंत्री लगातार होने वाले राजनैतिक हमलों से काफी हद तक बचे रहे थे. मीडिया रिपोर्ट से पता चला कि मंत्री से मुख्यमंत्री बनने के दौरान यादव और उनके करीबी तथा विस्तारित परिवार के सदस्यों के पास मौजूद जमीन कई गुना बढ़ गई. रिपोर्ट में दावा किया गया कि परिवार के सदस्यों ने जो जमीन खरीदी, उसमें कई ऐसे इलाकों में है, जहां उनके कार्यकाल में सरकारी विकास परियोजनाएं लाई गईं और इससे परिजनों को फायदा हुआ.कांग्रेस ने फौरन रिपोर्ट को मुद्दा बनाया और यादव के इस्तीफे

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