October 21, 2026
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एआई का खतरा
आम आदमी के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की दुनिया में हो रही घटनाओं पर यकीन न कर पाना स्वाभाविक हो सकता है। जुलाई के मध्य में एआई से जुड़े शेयरों के आसमान छूते मूल्यांकन और तेजी-मंदी के चक्र की अटकलों के बीच एक नया डर सामने आया—एआई से तबाही का अंदेशा। इसकी शुरुआत हगिंग फेस से हुई। अमेरिका के इस ओपन-सोर्स मशीन लर्निंग प्लेटफॉर्म का एआई डेवलपर समुदाय में खासा इस्तेमाल होता है और इसके करीब 1.3 करोड़ यूजर हैं। प्लेटफॉर्म ने बताया कि उस पर ऐसा साइबर हमला हुआ जैसा उसने पहले कभी नहीं देखा था।इस सेंध के पीछे एआई एजेंट यानी ऐसी स्वचालित प्रणालियां थीं जो सवालों के जवाब देने या सामग्री का सार बताने से आगे बढ़कर असल दुनिया में फैसले लेती हैं। इस मामले में उन्होंने जरूरत से ज्यादा फैसले ले लिए। पता चला कि चैटजीपीटी बनाने वाली कैलिफोर्निया की ओपनएआई की परीक्षण व्यवस्था से 1,206 एआई एजेंट निकल भागे थे, हर एजेंट अपने अलग घेरे से निकला, फिर आपसी संपर्क के लिए मैसेज बोर्ड बनाकर झुंड बनाया। आखिर में उन्होंने हगिंग फेस की प्रणालियों में सेंध लगा दी। हजारों स्वायत्त कार्रवाइयां। जानकारों ने इसे एआई के बेकाबू होने का मामला बताया।हर तरफ गंभीर चेतावनियों के बीच सितंबर की शुरुआत में एआई शोधकर्ता जैकब कॉक्सन की चेतावनी वायरल होने पर वैश्विक चिंता चरम पर पहुंच गई। ओपनएआई की अमेरिकी प्रतिद्वंद्वी एंथ्रोपिक से इस्तीफे के बाद 27 वर्षीय कॉक्सन ने लिखा, "एआई बनाने वाले लोग सचमुच मानते हैं कि यह दशक के अंत तक हम सबको मार सकता है। इस टेक्नोलॉजी की ताकत को कम न आंकें, जल्द ये प्रणालियां इंसानों से ज्यादा ताकतवर होंगी, किसी भी चीज को हैक कर सकेंगी, रातोंरात किसी भी क्षेत्र में क्रांति ला सकेंगी और असली ताकत तथा संसाधन हासिल कर लेंगी।"एआई समुदाय ने खतरे को नकारा नहीं, स्वीकार किया। एंथ्रोपिक के सह-संस्थापक और सीईओ डारियो अमोदेई ने गंभीर चेतावनी दी, "एआई की क्षमताएं जिस तेजी से बढ़ रही हैं, उसे देखते हुए मुझे डर है कि 6-12 महीने में ऐसा झुंड पूरे इंटरनेट पर कब्जा कर सकता है।" अमोदेई
दक्षिण में नया सवेरा
दक्षिण के पांच राज्य—केरल, तमिलनाडु, कर्नाटक, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश—देश की अर्थव्यवस्था में अहम भूमिका निभाते हैं. ये मिलकर भारत की जीडीपी में करीब एक-तिहाई योगदान देते हैं और अपनी समृद्ध सांस्कृतिक तथा राजनीतिक विविधता के लिए भी जाने जाते हैं. 29 और 30 सितंबर को कोच्चि में आयोजित इंडिया टुडे साउथ कॉन्क्लेव में राजनीति, कारोबार, रक्षा, शिक्षा, सिनेमा, कला और संस्कृति से जुड़े दिग्गज एक मंच पर जुटे. इस दौरान देश के भविष्य में दक्षिण की भूमिका पर विस्तृत चर्चा हुई. कॉन्क्लेव का आगाज रक्षा क्षेत्र पर चर्चा से हुआ. एस्ट्रा माइक्रोवेव प्रोडक्ट्स, न्यूस्पेस रिसर्च एंड टेक्नोलॉजीज और रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन के विशेषज्ञों ने स्वदेशी रक्षा विनिर्माण में दक्षिण के योगदान को रेखांकित किया. भारतीय तटरक्षक के महानिदेशक परमेश शिवमणि ने एआई के जरिए समुद्री सुरक्षा को मजबूत करने पर बात की.राजनीतिक सत्रों में जाति जनगणना, आरक्षण, चुनाव सुधार, युवा राजनीति और धर्म तथा राजनीति के साथ-साथ परिसीमन के विवादास्पद मुद्दे पर भी चर्चा हुई.