indiatoday-hindi Thank You! Redirecting Now
  • Search@2x
October 07, 2026

शिक्षा और रोजगार में नहीं मेल

लक्ष्मी नगर, दिल्ली में रहने वाले अर्जुन माहिर बढ़ई हैं और पिछले 25 साल से यही काम कर रहे हैं. उन्हें ज्यादातर काम लोगों की सिफारिश से मिलता रहा. काम की कभी कमी नहीं हुई. हालांकि उनके बेटे पिता के नक्शेकदम पर नहीं चलना चाहते थे. उन्होंने पढ़ाई करके पक्की तनख्वाह वाली नौकरी करना बेहतर समझा. अर्जुन के बड़े बेटे 28 वर्षीय पंकज कुमार ने बीए किया और बिहार में अपने गृह जिले गया के औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (आईटीआई) से फिटर का दो साल का कोर्स पूरा किया. फिर उन्हें एक ऑटो कंपनी में सालभर की अप्रेंटिसशिप मिली, लेकिन वह स्थायी नौकरी में नहीं बदल सकी. फिर उन्होंने 12-18 महीने छोटे-मोटे काम करते और दफ्तर की नौकरी तलाशते हुए गुजारे. आखिर उन्हें गुरुग्राम में नौकरी मिली, लेकिन कंपनी सिर्फ 12,000 रु. महीने दे रही थी. सो, उन्होंने कीर्ति नगर के फर्नीचर बाजार में प्लाईवुड की दुकान पर काम पकड़ लिया. अर्जुन कहते हैं, "अब वह दफ्तर की नौकरी से दोगुने से भी ज्यादा कमा रहा है. उसे बोनस और प्रॉविडेंट फंड भी मिलता है." उनके 26 वर्षीय छोटे बेटे विक्की कुमार ने भी ग्रेजुएशन पूरा कर लिया है और अब गया में ही किसी सरकारी स्कूल में शिक्षक की नौकरी तलाश रहा है.

सिक्का चलाने की लड़ाई

सत्रह सितंबर की सुबह करीब 10 बजे का वक्त था. दक्षिण मुंबई के सौ साल पुराने और मशहूर बॉम्बे हाउस के बाहर इंतजार कर रहे मीडियाकर्मियों में उत्सुकता बढ़ती जा रही थी. 180 अरब डॉलर (17.2 लाख करोड़ रुपए) के टाटा समूह की होल्डिंग कंपनी टाटा संस के बोर्ड की अहम बैठक होने वाली थी. कंपनी के छह सदस्यों वाले बोर्ड में चेयरमैन नटराजन चंद्रशेखरन, टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा, उद्योगपति वेणु श्रीनिवासन, हिंदुस्तान यूनिलीवर के पूर्व चेयरमैन हरीश मनवानी, निवेश विशेषज्ञ अनीता एम. जॉर्ज और टाटा समूह के मुख्य वित्त अधिकारी सौरभ अग्रवाल शामिल थे. बोर्ड के सामने दो अहम मुद्दे थे. पहला टाटा संस के नेतृत्व से जुड़ा था क्योंकि चंद्रा ने 12 अगस्त को ऐलान कर दिया था कि फरवरी 2027 में मौजूदा कार्यकाल खत्म होने के बाद वे तीसरा कार्यकाल नहीं मांगेंगे. दूसरा मुद्दा निजी कंपनी टाटा संस को शेयर बाजार में सूचीबद्ध करने के प्रस्ताव से जुड़ा था.इससे कुछ ही दिन पहले 11 सितंबर को भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी (एनबीएफसी) का दर्जा छोड़ने की टाटा संस की अर्जी खारिज कर दी थी. टाटा संस अपर-लेयर एनबीएफसी और खास तौर पर कोर इन्वेस्टमेंट कंपनी (सीआईसी) की श्रेणी में आती है क्योंकि वह समूह की प्रमुख होल्डिंग और निवेश कंपनी है, जो पूंजी आवंटन के साथ विभिन्न टाटा कंपनियों में शेयर रखती है. अपर लेयर में एक लाख करोड़ रुपए या अधिक की संपत्ति वाली एनबीएफसी आती हैं जबकि टाटा संस की

magzine
Previous Editions

Copyright © 2026 Living Media India Limited.For reprint rights: Syndication Today.