July 08, 2026
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बेमिसाल बनने की जद्दोजहद
लाखों जवान हिंदुस्तानियों को कॉलेज सिर्फ डिग्री नहीं देता. यह बेहतर कमाई, व्यापक दायरा, पेशेवर नेटवर्क, सामाजिक आत्मविश्वास और इलाकों, उद्योगों तथा तबके की सीमाओं के पार जाने की क्षमता का दरवाजा खोलता है. आबादी के फायदे के लिहाज से शिखर के करीब पहुंच रहे देश में उच्च शिक्षा खुद की और राष्ट्रीय आकांक्षा, दोनों के केंद्र में बनी हुई है. लेकिन कॉलेज की डिग्री का अर्थ बदल गया है. नौकरी का बाजार कठिन हो गया है, तकनीक हुनर को नया आकार दे रही है और स्नातकों में बेरोजगारी चिंता का विषय बनी हुई है. आज डिग्री के संग पढ़ाने की ठोस पद्धति, प्रासंगिक पाठ्यक्रम, व्यावहारिक प्रशिक्षण, इंटर्नशिप, भरोसेमंद मूल्यांकन और नियोक्ताओं से जुड़ाव भी जरूरी है. इसीलिए सही कॉलेज चुनना अब सही कोर्स चुनने जितना ही खास हो गया है. यह फैसला किसी युवा की पेशेवर आकांक्षा को आकार दे सकता है. यह भी तय कर सकता है कि परिवार का आर्थिक निवेश फायदा देता है या पछतावा. सरकारी और निजी कॉलेज की फीस के बीच फर्क बहुत बड़ा हो सकता है, खासकर मेडिकल, इंजीनियरिंग, कानून, डिजाइन और आर्किटेक्चर जैसे क्षेत्रों में. ऐसे परिदृश्य में अपने तीसवें वर्ष में पहुंचा इंडिया टुडे ग्रुप का बेस्ट कॉलेज सर्वे मददगार बनकर सामने आता है. नवाचार, एक्युरेसी और विश्वसनीयता पर आधारित यह सर्वे छात्रों, अभिभावकों, शिक्षकों और अन्य संबंधित पक्षों के लिए देश के कॉलेजों के माहौल का आकलन करने का भरोसेमंद पैमाना है. दिल्ली स्थित मार्केट रिसर्च एजेंसी एमडीआरए से कराए गए इस सर्वे में कॉलेज की प्रतिष्ठा से आगे जाकर फैकल्टी की गुणवत्ता, बुनियादी ढांचा, विविधता, फीस, फंडिंग, इंटर्नशिप, प्लेसमेंट, अकादमिक प्रगति और कैंपस माहौल जैसे पहलुओं को देखा जाता है. इससे परिवारों को विज्ञापन से अलग असली प्रदर्शन और संस्था की महत्वाकांक्षा को समझने में मदद मिलती है.जब यह सर्वे शुरू हुआ था, तब देश में आज की तुलना में बहुत कम कॉलेज थे और उनकी तुलना करने का लगभग कोई स्वतंत्र तरीका नहीं था. आज देश में 50,000 से ज्यादा कॉलेज हैं. विकल्प इतने ज्यादा हैं कि भ्रम पैदा
अपने क्षेत्र में आज भी अव्वल
हिंदू कॉलेज में एक सबसे रोमांचक बात है इंटरडिसिप्लिनरी लर्निंग का इकोसिस्टम. इस तंत्र से पॉलिसी, टेक्नोलॉजी, ग्लोबल जुड़ाव, रिसर्च, लीडरशिप और सामाजिक प्रभाव सब आपस में जुड़े हुए हैं.इसकी एक मिसाल पब्लिक पॉलिसी इन ऐक्शन (पीपीआइए) प्रोग्राम है. यह भारत की पहली अंडरग्रेजुएट-केंद्रित पब्लिक पॉलिसी लैब का प्रोग्राम है और इसे 2025 में इंडियन रेलवे फाइनेंस कॉर्पोरेशन और हिंदुस्तान स्टीलवर्क्स कंस्ट्रक्शन लिमिटेड के सहयोग से शुरू किया गया था. इस प्रोग्राम में क्लासरूम लर्निंग के साथ-साथ पॉलिसी सिमुलेशन, केस स्टडी, फील्ड का गहन अनुभव और आठ सप्ताह की मानदेय वाली इंटर्नशिप शामिल है और इसमें छात्रों को असली दुनिया के नीतिनियम संचालन और विकास से जुड़ी चुनौतियों को सीखने का मौका मिलता है.