March 25, 2026
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बारूदी बुमरा
अनुशासित, हुनरमंद, निर्विवाद और कामयाब—जसप्रीत बुमरा एक आदर्श खिलाड़ी की लगभग हर कसौटी पर खरे उतरते हैं. फिर भी उनके करिअर से मिलने वाला सबक थोड़ा उल्टा है. आम तौर पर बच्चों को सिखाया जाता है: अच्छी तैयारी करो, मेहनत से पढ़ो. उसके बाद कोई भी विषय मुश्किल नहीं रहेगा. पर दुनिया भर के शीर्ष बल्लेबाजों से पूछिए, जिन्होंने पिछले एक दशक का बड़ा हिस्सा बुमरा की गेंदबाजी को समझने में लगा दिया, फिर भी अक्सर वे उनकी गेंदों के सामने ऐसे जड़-से खड़े रह जाते हैं जैसे आंखों को चौंधिया देने वाली रोशनी में कोई खरगोश. और सिर्फ बल्लेबाज ही क्यों? जो गेंदबाज बुमरा की राह पर चलने की सोच रहे हैं, उन्हें भी शायद उस रास्ते से दूर ही रहना चाहिए. इंग्लैंड के तेज गेंदबाज जेम्स एंडरसन ने हाल में आइसीसी पुरुष टी20 विश्व कप के सेमीफाइनल में भारतीय तेज गेंदबाज को इंग्लैंड के खिलाफ मैच पलटते देख कर इसे सबसे सटीक ढंग से कहा: सनकी है बंदा. उनसे आप सीखने की जहमत नहीं उठा सकते. आप ही बताइए! दुनिया में है कोई दूसरा गेंदबाज जो एक ओवर की छहों गेंदें यॉर्कर और स्टंप उड़ाने वाली डाल सके? यह बात और भी अविश्वसनीय लगती है जब क्रिकेट आज सूक्ष्म वीडियो विश्लेषण और डेटा के युग में खेला जा रहा है. हर गेंद, हर ऐक्शन और हर रणनीति का बारीकी से अध्ययन किया जा सकता है. इसके बावजूद आज तक कोई भी जसप्रीत बुमरा को कैसे खेलें नाम की कोई किताब नहीं लिख पाया है. यह स्थिति हाल के वर्षोंर् में सीमित ओवरों के कई अन्य तेज गेंदबाजों से बिल्कुल अलग है. कैगिसो रबादा, शाहीन शाह अफरीदी और एनरिख नॉर्किए जैसे गेंदबाजों ने अपनी गति, उछाल, स्विंग और विविधताओं के दम पर विश्व क्रिकेट में जबरदस्त दबदबा बनाया. लेकिन ज्यादा समय नहीं लगा जब विरोधी टीमों ने उनकी गेंदबाजी को पढ़ना सीख लिया और उनके खिलाफ रणनीति भी तैयार कर ली. भारतीय टीम में बुमरा के साथी वरुण चक्रवर्ती इसकी ताजा मिसाल हैं. टूर्नामेंट में उतरते समय दुनिया के नंबर एक टी20 गेंदबाज रहे इस मिस्ट्री स्पिनर की सफलता काफी हद तक उनकी बैक-ऑफ-द-हैंड गुगली पर टिकी थी, जो पारंपरिक लेग-ब्रेक से ज्यादा असरदार साबित होती थी. लेकिन प्रतियोगिता के बीच तक आते-आते बल्लेबाजों ने उन्हें समझ लिया. जब तक वे उभरता खतरा थे, तब तक रडार से बाहर रहे. मगर जैसे ही उन्हें मैच जिताने वाले गेंदबाज के तौर पर पहचाना गया, टीमों ने जल्दी ही उनका तोड़ निकाल लिया. बुमरा के साथ ऐसा नहीं है. उनकी गेंदबाजी में कोई रहस्य नहीं छिपा. जिसने भी इस गुजराती तेज गेंदबाज को करीब से देखा है, वह जानता है कि अगली गेंद क्या हो सकती है—अगर बाउंसर पर चौका पड़ा है तो अगली गेंद अक्सर यॉर्कर होगी; आक्रामक बल्लेबाज को वे धीमी गेंद से फंसाते हैं; और जो बल्लेबाज हिचकिचाता दिखे, उसके लिए ऑफ स्टंप के ऊपर की हार्ड लेंथ वाली गेंद तैयार रहती है. फिर भी, बल्लेबाज चाहे जितना अनुमान
खिताब भी बचया खुद को भी
कपिल के साथ उनके करिश्माई थे; धोनी ने अपने भरोसेमंद धुरंधरों की फौज संभाली और रोहित ने रणबांकुरों वाली टीम की अगुआई की. लेकिन अब जबकि भारत आइसीसी टी-20 विश्व कप खिताब सफलतापूर्वक बचाए रखने वाला पहला देश बन चुका है, तो मौजूदा टीम की उपल्ब्रिरध को सूर्यकुमार यादव के कुछेक सितारों की सफलता कहना न्यायसंगत न होगा. यहां टीम भावना का सिद्धांत साकार हुआ है. कोच गौतम गंभीर ने भी जीत के बाद इसी बात पर जोर देते हुए कहा कि टीम को हमेशा व्यक्तिगत खिलाड़ियों से ऊपर होना चाहिए. यह एक ऐसी टीम थी जो एक या दो सितारों पर निर्भर नहीं थी. खिताब की प्रबल दावेदार होने के बावजूद अजेय नहीं लग रही थी. कुछ कमियां थीं लेकिन संकट के समय काम आने वाले घातक हथियार भी थे. हर सफल टूर्नामेंट अभियान की तरह इस जीत के पीछे भी उन खिलाड़ियों के असाधारण प्रयास थे जिन्होंने दबाव के समय अपना श्रेष्ठ दिया और मुकाबले का रुख पलट दिया. संजू सैमसन के लिए तो यह अस्तित्व की लड़ाई थी. उतार-चढ़ाव भरे एक दशक लंबे सफर में कई बार टीम में जगह बनाने से चूकने, मौके गंवाने, नजरअंदाज किए जाने के बाद उन्हें फिर से देश का गौरव बनने का अवसर मिला. वह भी एक नहीं, तीन बार. गंभीर खुद मानते हैं कि वेस्टइंडीज के खिलाफ सैमसन की नाबाद 97 रन की पारी टूर्नामेंट में भारत के लिए निर्णायक क्षण की तरह था. हार्दिक पंड्या के लिए यह एक मिशन था, साबित करने का कि वे सिर्फ शारीरिक ही नहीं मानसिक तौर पर भी मजबूत हैं और एक भरोसेमंद ऑलराउंडर के तौर पर अपनी जगह पक्की करने की काबिलियत रखते हैं. उप-कप्तान अक्षर पटेल दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ टीम से बाहर रहे और वापसी कर उन्होंने शानदार प्रदर्शन किया. ईशान किशन ने भारतीय टीम में जगह गंवाने के बाद झारखंड और आइपीएल की सनराइजर्स टीम के साथ खेलते हुए अपना कौशल निखारा और वापसी की. अब कहीं ज्यादा परिपक्व खिलाड़ी बन चुके किशन टी-20 में बल्लेबाजों की सूची में दूसरे नंबर पर हैं. खुद कप्तान की बात करें तो सूर्यकुमार यादव ने नॉकआउट में बल्ले से कोई खास कमाल नहीं दिखाया लेकिन अपने संयत नेतृत्व और सटीक निर्णय क्षमता से सबका ध्यान जरूर खींचा. इन पांचों खिलाड़ियों का जोश और जुनून इन्हें आपस में जोड़ता है. इस संयोजन के बल पर आसमान छुआ जा सकता है.