May 20, 2026
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नेताओं को बताने लगे औकात
शासक और शासितों को हमेशा एक-दूसरे से कोई न कोई शिकायत रहती आई है. पर बीते कुछ हफ्तों में मध्य प्रदेश में शासकों का ही एक तबका दूसरे के खिलाफ हो गया है. इसे आप ताकतवर बनाम स्थायी शासक कह सकते हैं—यानी वे राजनेता जो अभी सत्ता में हैं और नौकरशाहों का वह खेमा जो हमेशा सत्ता में रहता है. उनके बीच का नाजुक समझौता जब-तब टूटने के पीछे सिस्टम से जुड़ी कुछ वजहें हैं. कम-से-कम नौकरशाहों के लिए तो इन कारणों को खुलकर बताना अक्सर जोखिम भरा होता है. इसलिए, उनके बीच की नाराजगी अक्सर छोटी-मोटी तकरार के रूप में सामने आती है. मौजूदा तकरार शुरू होने के तरीके से ही आप इसका अंदाज लगा सकते हैं. इसकी पहली
अब खिलाड़ी जीन की खोज
यह एक ऐसा विचार था जो बिजली की तरह कौंधा और करीब 90 साल पहले खेल की दुनिया के मानस-पटल पर नाटकीय ढंग से दर्ज हो गया. दरअसल, 1936 के बर्लिन ओलंपिक में जेसी ओवेंस ने श्वेत नस्लीय श्रेष्ठता की धारणा को ध्वस्त कर दिया. तब से चैंपियन के डीएनए की खोज जारी है, जिसमें नस्लीय विचारों की छाया भी रही है. भारत ने भी 1980 के दशक में स्पेशल एरिया गेम्स (एसएजी) योजना के जरिए कोशिश की और एक तरह की जातीय प्रतिभा की खोज की. इसने हमें लिम्बा राम और मैरी कॉम सरीखे खिलाड़ी दिए. कभी एसएजी की प्रयोगशाला रहे गुजरात ने अब 21वीं सदी का अपना नया संस्करण शुरू किया है. वह है पांच साल का स्पोर्ट्स जीनोमिक्स प्रोग्राम (एसजीपी). इसके तहत 10 खेल विधाओं में राज्य के 10,000 खिलाड़ियों के डीएनए की सीक्वेंसिंग की जाएगी, ताकि ऐसे आनुवंशिक संकेतकों की खोज की जा सके जो चैंपियनों को बाकी से अलहदा बनाते हैं. यह शायद अब तक का भारत का सबसे महत्वाकांक्षी खेल-विज्ञान प्रयोग हो सकता है. गुजरात बायोटेक्नोलॉजी रिसर्च सेंटर (जीबीआरसी) की अगुआई में एसजीपी सहनशक्ति और तुरंत जोरदार ताकत लगाने वाले खेलों में राज्य के खिलाड़ियों का संपूर्ण जीनोम सीक्वेंसिंग करेगा. इससे पहले जीबीआरसी देश की पहली जनजातीय जीनोम सीक्वेंसिंग पहल का नेतृत्व कर चुका है. इससे तैयार होने वाला गुजरात एथलीट जीनोम डेटाबेस (जी-एजीडी) जीनोटाइप, शारीरिक (फिजियोलॉजिकल) और प्रदर्शन से जुड़े आंकड़ों को एकीकृत करेगा, ताकि चोटों के आनुवंशिक जोखिम के कारकों की पहचान की जा सके. साथ ही, लिंग और उम्र से जुड़ी भिन्नताओं को समझा जा सके और रिकवरी के प्रोटोकॉल तैयार किए जा सकें.