November 11, 2026
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चीन ने पूर्वी मोर्चे पर बढ़ाया तनाव
लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर भारत-चीन के बीच पिछले कुछ समय से तो शांति है. अब अरुणाचल प्रदेश सीमा पर तनाव के मुख्य केंद्र के तौर पर उभरता दिख रहा, अलवर में 22 अक्तूबर को भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आइटीबीपी) के महानिदेशक शत्रुजीत कपूर ने केंद्रीय प्रशिक्षण कॉलेज में आयोजित कार्यक्रम में खुलासा किया कि हाल के दिनों में अरुणाचल प्रदेश सीमा पर कई स्थानों पर चीनी सैनिकों के साथ आमना-सामना हुआ. खास क्षेत्रों का नाम लिए बगैर उन्होंने इन झड़पों के दौरान बल के शौर्य कमांडो की "असाधारण" जांबाजी के लिए प्रशंसा की. इन टिप्पणियों ने व्यापक चिंता पैदा की और एलएसी को फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया. यह सीमा पर गश्ती टुकड़ियों के बीच टकराव की पहली आधिकारिक स्वीकारोक्ति थी, जो जुलाई से ही सोशल मीडिया बहस का विषय बनी हुई है. कपूर की टिप्पणी ने अरुणाचल के ऊपरी सुबनसिरी जिले में तकसिंग के पास असाफिला में आइटीबीपी और पीपल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) के सैनिकों के बीच टकराव की खबरों के खुले रहस्य की पुष्टि की. इसके बाद, एलएसी पर तनाव कम करने के लिए 6 सितंबर को वाचा-दमई सीमा बैठक बिंदु पर दोनों पक्षों के बीच कोर कांडर स्तर की पहली बैठक हुई, वार्ता के बाद कथित तौर पर पीएलए, भारतीय सेना और आइटीबीपी ने तकसिंग और लिमेकिंग क्षेत्रों में सैनिकों की संख्या को अगस्त के 1,000 से घटाकर लगभग 200-200 कर दिया. झड़पों को लेकर सैन्य हलकों में बेचैनी के पीछे एक गहरा रणनीतिक डर छिपा है कि बहुत संभव है कि बीजिंग भारतीय प्रतिक्रियाओं का परीक्षण करके और तथाकथित सलामी स्लाइसिंग यानी धीरे-धीरे जमीन हड़पने की नीति के जरिए सीमाओं को आगे बढ़ाकर पूर्वी हिमालय में ग्रे-जोन गतिविधियां बढ़ा रहा है. झड़पों के बारे में पूछे जाने पर विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने 23 अक्तूबर को कहा, "भारत-चीन सीमा क्षेत्रों में स्थिति तब बिगड़ती है... जब चीनी बल निर्धारित गश्त पैटर्न से हटते हैं." तनाव का नया क्षेत्र बहरहाल, भारतीय सेना के लिए ऊंचे-नीचे भूभाग, लॉजिस्टिक्स आपूर्ति में कठिनाई और व्यापक तैयारियों की आवश्यकता वाले अरुणाचल प्रदेश में अभियान संबंधी कई तरह की चुनौतियां हैं. सैन्य विशेषज्ञों का मानना है कि चीन भारतीय चौकियों की मौजूदा सीमा-प्रबंधन प्रणालियों की क्षमता परखना चाहता है. नई दिल्ली के लिए सवाल यह है कि क्या ये झड़पें छिटपुट घटनाएं हैं या भारत को दबाव में रखने की किसी सोची-समझी रणनीति का हिस्सा हैं. एक वरिष्ठ सैन्य अधिकारी का मानना है कि चीन ने अरुणाचल प्रदेश पर अपने दावे को जिंदा रखने के लिए एलएसी पर दबाव बढ़ाने का फैसला किया है. साथ ही, अगस्त में भारत ने आधिकारिक नक्शे पर राज्य के 27 स्थानों और भू-भागों को उनके मानक नामों से औपचारिक तौर पर चिन्हित किया, उसके पहले लद्दाख में 28 भूभागों को चिन्हित किया गया था. चीन का मौजूदा उकसावा उसकी भी प्रतिक्रिया है. अरुणाचल प्रदेश के अधिकांश हिस्से की जिम्मेदारी संभालने वाली दीमापुर स्थित तीसरी कोर के पूर्व कमांडर सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल एस. एल. नरसिंहन बताते हैं कि चीनी सैनिक वर्षों से इन क्षेत्रों में आते-जाते रहे हैं. उन्होंने कहा, "इस बार, मुझे लगता है कि वे वहीं जम गए हैं. उनकी असामान्य गतिविधियों पर हमें बहुत सावधान रहना होगा, जब तक हम नक्शों के आदान-प्रदान के जरिए इस मुद्दे को स्पष्ट नहीं कर लेते, ऐसी समस्याएं बार-बार सामने आती रहेंगी."
खुजली अब बड़ी बला
चमड़ी पर शुरू होने वाली मामूली सनसनाहट. यह खुजलाए बिना जाती ही नहीं. यही है खुजली, यह सांस लेने जितनी जानी-पहचानी और सबको महसूस होने वाली सहज इच्छा है. और लगता है कि लोग अब पहले से ज्यादा खुजला रहे हैं. 20 देशों के 50,552 लोगों पर हुए और ब्रिटिश जर्नल ऑफ डर्मेटोलॉजी में प्रकाशित 2024 के एक अध्ययन में 39.8 फीसद लोगों ने बताया कि उन्होंने पिछले सात दिनों में एक न एक बार खुजाया है. उसी अध्ययन में शामिल 3,000 भारतीयों में यह आंकड़ा 42.6 फीसद था. हर किसी को कभी-न-कभी खुजली होती है. तो इसमें नया क्या है? नया यह कि खुजली अब केवल ऊपरी परेशानी नहीं, बल्कि भीतर छिपी बीमारी का लक्षण भी हो सकती है. घर में मेज की दराज या मोहल्ले में ही दवाई की दुकान से कोई पुरानी क्रीम उठाकर लगा लेना इससे छुटकारे के लिए काफी नहीं. त्वचा इंसानी शरीर का सबसे बड़ा अंग है और खुजली उसका यह बताने का एक तरीका है कि कोई चीज उसे परेशान कर रही है. खास नसों के सिरे विभिन्न प्रकार की हरकतों पर प्रतिक्रिया करते हैं, हिस्टामिन नाम के रासायनिक संकेत छोड़कर उन्हें दिमाग तक भेजते हैं. इसके बाद दिमाग खुजलाने की इच्छा पैदा करता है. सामान्य खुजली नुक्सानदेह नहीं होती, लेकिन छह हफ्ते से ज्यादा चलने वाली खुजली जिसे चिकित्सा भाषा में क्रॉनिक पुराइटस कहते हैं- गहरी परेशानी का संकेत हो सकती है. लगातार बनी रहने वाली, बार-बार लौटने वाली या इलाज से ठीक न होने वाली खुजली की डॉक्टरी जांच जरूरी है. भारतीय त्वचा रोग संबंधी शोध अब संवेदनशील त्वचा, जिद्दी एक्जिमा और बार-बार होने वाले फंगल इन्फेक्शन पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं. फ्रंटियर्स इन मेडिसिन में प्रकाशित भारतीय विशेषज्ञों के 2025 के एक बयान ने खुजली, लालिमा और रूखेपन वाली संवेदनशील त्वचा को देश में बड़ी त्वचा समस्या बताया. उसने जलवायु, प्रदूषण और रोजमर्रा की चीजों के संपर्क को अहम वजह माना, गुरुग्राम के आर्टेमिस अस्पताल में डर्मेटोलॉजी और कॉस्मेटोलॉजी की प्रमुख डॉ. मोनिका बांबरू कहती हैं, "हमारे पास ऐसे मरीज बढ़ रहे हैं जिनकी खुजली एक बार की समस्या नहीं रही. वह बार-बार लौटती रहती है क्योंकि उसकी बुनियादी वजह खत्म नहीं हुई." दवा प्रतिरोधी फंगल इन्फेक्शन चिंता का सबब है, जिसमें फंगस इस तरह बदल जाता है कि आम ऐंटीफंगल दवाएं कम असरदार हो जाती हैं. लगातार खुजली का असर रोजमर्रा की गतिविधियों, काम और निजी आराम तक को चपेट में ले सकता है.