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November 04, 2026

ट्रंप के ये संकटमोचन

उस जगह का भी अपना संदेश था. मुंबई का ताज महल पैलेस होटल, जो 26/11 हमलों का प्रमुख निशाना था, अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रूबियो और भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर इंडिया टुडे के साथ साझा खास बातचीत के लिए वहीं बैठे. इस क्षेत्र में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सरकार का प्रतिनिधित्व करने वाले ये दो सबसे अहम चेहरे हैं. राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार की जिम्मेदारी भी संभाल रहे रूबियो विदेश नीति के सबसे वरिष्ठ पदाधिकारी हैं. इस साल उनका यह दूसरा भारत दौरा था. ट्रंप के पुराने भरोसेमंद गोर दिल्ली भेजे जाने से पहले व्हाइट हाउस में नियुक्तियों का काम देखते थे. उन्हें भारत में "हमारी सरकार के शीर्ष स्तर" को सक्रिय करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है.उनका काम रिश्तों की मरम्मत करना है. फरवरी 2025 के मोदी-ट्रंप शिखर सम्मेलन में 500 अरब डॉलर (47.3 लाख करोड़ रु) के व्यापार का लक्ष्य, 10 साल का रक्षा ढांचा और तकनीक, महत्वपूर्ण खनिजों तथा एआइ से जुड़ी नई साझेदारियों का एलान हुआ था, मगर ये महत्वाकांक्षाएं जल्द ही विवादों के ढेर में दब गईं. उनमें 50 फीसदी का दंडात्मक टैरिफ, रूसी तेल खरीदने पर जुर्माना, भारत-पाकिस्तान के बीच युद्धविराम कराने के ट्रंप के बार-बार के दावे, पाकिस्तानी फील्ड मार्शल आसिम मुनीर से वाशिंगटन की बढ़ती नजदीकी और नए एच-1बी वीजा पर 1,00,000 डॉलर (95 लाख रुपए) का शुल्क शामिल था, जिससे सबसे ज्यादा मार भारतीयों पर पड़ती है. जनवरी 2026 के अंतरिम व्यापार समझौते से टैरिफ घटकर 18 फीसदी हुआ और बाद में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने उसको आधार दर यानी 10 फीसदी तक करने का रास्ता कर दिया, फिर भी ट्रंप डील पर अब तक दस्तखत नहीं हुए हैं. ट्रंप ने रूस और चीन और ईरान प्रतिबंध कानून के प्रावधानों में छूट दी है, जो उन्हें रूसी और ईरानी तेल खरीदने वालों पर 100 फीसदी तक टैरिफ लगाने की ताकत देते हैं. इसी पृष्ठभूमि में ट्रंप के दो प्रमुख संकटमोचन मुंबई पहुंचे.भारत-अमेरिका रिश्तों को एक से दस के पैमाने पर आंकने के सवाल पर रूबियो ने कोई अंक देने से इनकार कर दिया, उन्होंने कहा, "पांच साल बाद हम पीछे मुड़कर देखेंगे और कहेंगे कि यह दुनिया के सबसे मजबूत रिश्तों में से एक है." उनकी यह उम्मीद आगे की पूरी बातचीत की दिशा तय करती है. कूटनीतिक शिष्टाचार को अलग रख दें तो खास बातचीत से पता चलता है कि अमेरिकी प्रशासन ने चुपचाप अपना रुख बदला है—भारत पर दबाव डालने से व्यापार के लिए उसे साधने की ओर, नरमी का सबसे स्पष्ट संकेत व्यापार के मोर्चे पर मिला, जिसने आपसी भरोसे को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाया. जब पूछा गया कि क्या वाशिंगटन भारत को उसकी मांग के मुताबिक प्रतिस्पर्धी टैरिफ लाभ देने को तैयार है तो रूबियो ने संकेत दिया कि लंबे समय से अटका द्विपक्षीय समझौता लगभग तैयार है. टैरिफ में बार-बार बदलाव को लेकर भारत की चिंता पर विदेश मंत्री का जवाब और भी अहम था. रूबियो ने कहा कि समझौते का मकसद निश्चितता कायम करना है, ताकि कारोबारी द्विपक्षीय व्यापार के नियम जानकर निवेश कर सकें. यह जोर देने के नजरिए में आया बदलाव महत्वपूर्ण है. पहले अमेरिका का रवैया रियायतें लेने के लिए टैरिफ को दबाव के हथियार की तरह इस्तेमाल करने पर टिका था, रूबियो टिकाऊ आर्थिक साझेदारी की बुनियाद के रूप में स्थिरता पर जोर दे रहे थे.उधर, गोर ने दोनों देशों के बीच बढ़ते दोहराव निवेश का हवाला देकर आर्थिक रिश्तों को और मजबूत बताया. उन्होंने अमेरिका में एस्सार की अरबों डॉलर की निवेश योजनाओं और भारत में अमेरिकी तकनीकी कंपनियों की मौजूदगी का जिक्र किया. संदेश साफ था: ट्रंप प्रशासन ऐसा रिश्ता चाहता है जो दोनों देशों में रोजगार पैदा करे और औद्योगिक क्षमता बढ़ाए, अब रिश्तों की सफलता को केवल व्यापार के आंकड़ों से नहीं, बल्कि निवेश से भी आंका जा रहा है.ऊर्जा नीति में ज्यादा अहम बदलाव होता दिख रहा है. कई महीनों से भारत की सस्ते रूसी

ई-गेम का खेल खत्म

अभी कुछ साल पहले तक सौरभ चंद्राकर छत्तीसगढ़ के भिलाई में छोटी-सी दुकान से फलों का जूस बेचता था. आज उस पर महादेव ऑनलाइन बुक नाम का अवैध सट्टा साम्राज्य खड़ा करने का आरोप है, जिसका रोजाना कारोबार अधिकतम 240 करोड़ रुपए से ज्यादा बताया गया. आरोप है कि दुबई में बैठकर 31 वर्षीय चंद्राकर ने ऐसा अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क बनाया जो लाखों भारतीयों से दांव लगवाता और उसके प्रमोटरों के लिए बेहिसाब दौलत जुटाता था. मगर इस साल जून में उसकी किस्मत ने साथ छोड़ दिया. भारतीय जांचकर्ताओं के मुताबिक, जाली पासपोर्ट पर अरब मुल्क ओमान में दाखिल होने के आरोप में उसे राजधानी मस्कट में गिरफ्तार किया गया. चंद्राकर की गिरफ्तारी ने देश के सबसे बड़े ऑनलाइन सट्टेबाजी घोटालों में एक की जांच में भारत को अहम सुराग दिया है.चंद्राकर का गुमनामी से हैरतअंगेज उभार शायद नजर में न आता, अगर उसने नई-नई दौलत का भद्दा खुला दिखावा न किया होता. फरवरी 2023 में उसने संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) में अपनी आलीशान शादी पर कथित तौर पर करीब 200 करोड़ रुपए खर्च किए, रिश्तेदारों और मेहमानों को चार्टर्ड विमानों से बुलाया और बॉलीवुड सितारों से नाच-गाने के कार्यक्रम करवाए. यह फिजूलखर्ची संदिग्ध वित्तीय लेनदेन की जांच कर रहे अधिकारियों के लिए बड़ा सुराग बनी. प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने पैसे की कड़ी जोड़ी तो उसके मुताबिक, देश भर में सैकड़ों स्थानीय पैनलों से चलने वाले विशाल सट्टा सिंडिकेट का पता चला. इससे हुई कमाई हजारों बैंक

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