June 10, 2026
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बार-बार फेल
राजस्थान में सीकर के 22 वर्षीय प्रदीप मेघवाल पिछले तीन साल से नीट-यूजी (नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट-अंडरग्रेजुएट) की तैयारी कर रहे थे. उन्हें भरोसा था कि इस बार उनका दाखिला किसी टॉप मेडिकल कॉलेज में हो जाएगा. लेकिन 3 मई को हुई परीक्षा पेपर लीक के बाद रद्द कर दी गई, तो लीक होने के तीन दिन बाद 15 मई को उसने अपने घर में आठमहठया कर ली. उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी में 21 वर्षीय ऋतिक मिश्र ने भी यही रास्ता चुना. रद्द हुई परीक्षा ने उनके तीसरे प्रयास पर भी पानी फेर दिया था. 20 वर्षीया अंशिका पांडेय, जो पिछली बार सिर्फ चार अंकों से सीट पाने से चूक गई थीं, अपना तीसरा प्रयास हाथ से निकल जाने का सदमा न झेल सकीं और दिल्ली के आजादपुर में उन्होंने भी जान दे दी. गोवा में 17 साल के एक छाला ने प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए हॉकी के प्रति अपने जुनून को पीछे कर दिया था. वह भी दबाव झेल नहीं पाया. उसने भी मौत चुन ली. चार युवा जिंदगियां उस तार-तार हुई परीक्षा व्यवस्था की मानवीय कीमत बन गईं, जिसे देश की प्रमुख परीक्षा संस्था नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) चलाती है, जिसे दो बार अपनी व्यवस्था सुधारने की चेतावनी दी गई, लेकिन हालात नहीं बदले. नीट-यूजी 2026 एक दिन की पेन-ऐंड-पेपर परीक्षा थी, जिसमें 565 शहरों के 5,400 से यादा केंद्रों पर करीब 22.8 लाख छालाों ने हिस्सा लिया. इस परीक्षा के जरिए देश के 823 मेडिकल कॉलेजों की 1,29,805 एमबीबीएस सीटों और 330 डेंटल कॉलेजों की 27,695 बीडीएस सीटों पर दाखिला होना था. परीक्षा के कुछ ही दिनों बाद करीब 410 सवालों वाला एक हस्तलिखित गेस पेपर सामने आया. बताया गया कि यह पेपर परीक्षा से पहले ही व्हाट्सऐप और टेलीग्राम पर उपलब्ध था. कुछ छालाों को यह 42 घंटे पहले मिला था, जबकि कुछ के पास यह करीब एक महीने पहले पहुंच चुका था. सीकर के एक व्हिसल8लोअर ने जब इसका मिलान आधिकारिक प्रश्नपला से किया तो दोनों में चौंकाने वाली समानता मिली. कथित तौर पर 720 में से लगभग 600 अंकों के सवाल एक जैसे थे. एनटीए की अपनी आंतरिक जांच में पाया गया कि लीक हुई सामग्री केमिस्ट्री के पेपर से पूरी तरह मेल खाती थी, जबकि बायोलॉजी के बड़े हिस्से भी मिलते-जुलते थे. गेस पेपर के करीब 120 सवाल असली परीक्षा में आए थे. 12 मई को एनटीए ने पहली बार पूरे देश में परीक्षा रद्द कर दी. अब दोबारा परीक्षा 21 जून को कराई जाएगी.
ऑपरेशन सिंदूर हमारी पहली नेटवर्क केंद्रित जंग थी
प्रे.ऑपरेशन सिंदूर से प्रतिरोधक ताकत और सैन्य कार्रवाई को लेकर देश की सोच कैसे बदली? ऑपरेशन सिंदूर हमारे अनुभव में आए पहले के सैन्य अभियान या युद्ध-नीतियों से बुनियादी तौर पर अलग था. कई मायनों में यह हमारा पहला सही अर्थोर्ं में मल्टी-डोमेन या बहुपक्षीय ऑपरेशन था. सेना के तीनों अंगों का यह एकीकृत अभियान था, लेकिन उससे भी बढ़कर हमने ऑपरेशन के ढांचे में साइबरस्पेस और सूचना युद्ध को भी शामिल किया. समन्वय का यह स्तर रातोरात तैयार नहीं हुआ था. यह पिछले तीन से चार वर्षों से सेना के तीनों अंगों के बीच तालमेल और एकीकरण की दिशा में की गई लगातार कोशिशों का नतीजा था. इस ऑपरेशन के दौरान उसका इजहार शानदार ढंग से हुआ. सेना के तीनों अंगों के बीच सम9वय और आपसी समझ असाधारण थी. मेरे लिए यह ऑपरेशन इस बात का पुख्ता सबूत था कि एकीकरण और तालमेल की दिशा बिल्कुल सही है. ऑपरेशन सिंदूर के सबसे बड़े सबक ॠया थे? एक तो राजनीतिक सबक यह है कि आज सभी देशों के