June 03, 2026
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कमर कसने का वक्त
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 10 मई को सिकंदराबाद की जनसभा में कोविड के वर्षों का जिक्र करके पुरानी यादें भर ताजा नहीं कीं. असल में यह एक चेतावनी थी. महामारी के दौरान लोगों ने वर्क फ्रॉम होम, ऑनलाइन मीटिंग और कम खर्च की जिंदगी के साथ तालमेल बिठा लिया था. अब मोदी का इशारा है कि शायद उन्हीं तरीकों की फिर जरूरत पड़े. लेकिन किसी वायरस के कारण नहीं, बल्कि देश के दरवाजे पर दस्तक दे रहे आर्थिक तूफान की वजह से. यह तूफान हजारों मील दूर पश्चिम एशिया से उठा है. अमेरिका, इज्राएल और ईरान के बीच जंग के हालात खत्म न होने से ऊर्जा बाजार हिचकोले खा रहा है, कच्चे तेल की कीमतें चढ़ गई हैं, खाड़ी देशों से भारत आने वाली रकम बैठ गई है और देश में विदेशी पूंजी का प्रवाह टूटता जा रहा है. हाल ही पांच में से तीन विधानसभा चुनावों में जीत हासिल करने वाली सरकार के मद्देनजर मोदी के संदेश का वक्त अहम था. प्रधानमंत्री लोगों से आने वाले मुश्किल समय के लिए तैयार रहने और स्वेच्छा से खर्च में कटौती करने की अपील कर रहे थे. उन्होंने एक साल तक सोना न खरीदने, विदेश यात्रा और डेस्टिनेशन वेडिंग से बचने, यथासंभव वर्क फ्रॉम होम करने, खाद और खाने के तेल का इस्तेमाल कम करने, सार्वजनिक परिवहन और कार-पूलिंग का उपयोग करने, और स्वदेशी सामान अपनाने की पैरवी की. मोदी ने कहा, कोरोना काल के दौरान हमने वर्क फ्रॉम होम, ऑनलाइन मीटिंग, वीडियो कॉन्फ्रेंसों को अपनाया था. आज वक्त है कि हम उन तौर-तरीकों को फिर से अपनाएं. इस अपील की वजह भारत के चालू खाते के घाटे—यानी विदेशी मुद्रा की आमद और खर्च का फासला—में चिंताजनक बढ़ोतरी है. इसका मुख्य कारण ऊर्जा कीमतों में तेज उछाल है. फरवरी में ईरान पर अमेरिकी और इज्राएली हमलों से पहले ब्रेंट क्रूड की कीमत 70 डॉलर (6,700 रु.) प्रति बैरल थी जो बढ़कर लगभग 110 डॉलर (10,500 रु.) प्रति बैरल तक पहुंच गई. यह पिछले साल जुलाई की तुलना में 60 फीसद से भी ज्यादा है. अनुमान है कि ईंधन कीमतों में वृद्धि की घोषणा से पहले, देश की तेल रिफाइनरियों को हर दिन लगभग 1,000 करोड़ रु. का नुक्सान हो रहा था. नतीजतन, चालू खाता
अमेरिका में कानूनी फतह
अमेरिकी न्याय विभाग (डीओजे) ने नवंबर 2024 के 26.5 करोड़ डॉलर (2,568 करोड़ रुपए) के कथित रिश्वतखोरी मामले में अदाणी समूह के चेयरमैन गौतम अदाणी, उनके भतीजे सागर अदाणी, अदाणी ग्रीन एनर्जी के सीईओ विनीत एस. जैन और अन्य के खिलाफ सभी आपराधिक आरोप स्थायी रूप से हटा दिए हैं. समूह ने अमेरिकी बाजार नियामक सिक्योरिटीज ऐंड एक्सचेंज कमिशन (एसईसी) के साथ एक दीवानी मामला भी सुलझा लिया है. गौतम और सागर अदाणी के खिलाफ यह मामला अदाणी ग्रीन एनर्जी के 75 करोड़ डॉलर (7,245 करोड़ रुपए) के बॉन्ड जारी करने के दौरान अमेरिकी निवेशकों को गुमराह करने के आरोपों से जुड़ा था. इसके अलावा, अदाणी समूह ईरानी तेल की खरीद में कथित प्रतिबंधों के उल्लंघन से जुड़े एक दीवानी मामले को सुलझाने के लिए अमेरिकी ट्रेजरी विभाग को 27.5 करोड़ डॉलर (2,656 करोड़ रुपए) का भुगतान करने पर भी सहमत हो गया है. तीन हाइ-प्रोफाइल मामलों का एक के बाद एक बंद होना अदाणी परिवार के लिए बड़ी राहत की बात है. इन आरोपों ने एक साल से