October 28, 2026
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धर्म का पकड़ा मर्म
डायरेक्टर: नितेश तिवारी प्रोड्यूसर: नमित मल्होत्रा बजट: 4,000 करोड़ रुपए रिलीज की तारीख: 5 नवंबर भारतीय सिनेमा की सबसे महंगी फिल्म कही जा रही, दो भागों वाली इस महागाथा पर बहुत कुछ दांव पर लगा है. मल्होत्रा को उम्मीद है कि जानी-पहचानी कहानी पर आधारित और वीएफएक्स से सजी यह फिल्म न केवल भारत में बल्कि विदेशी बाजारों में भी अच्छा प्रदर्शन करेगी. “यह मेरे लिए सिर्फ एक रोमांचक किरदार या फिल्म नहीं, बल्कि एक जिम्मेदारी है. मेरा काम सिर्फ इस किरदार के काबिल बनना नहीं; मेरा काम इस कहानी में लोगों के भरोसे पर खरा उतरना है.”— रणबीर कपूर, राम का किरदार निभाने पर, रामायण के प्रमोशनल वीडियो से अगस्त की शुरुआत में आध्यात्मिक गुरु नीम करौरी बाबा पर बनी एक सुखद-सी फिल्म सिनेमाघरों में रिलीज़ हुई. चिंता इस बात की थी कि 2026 में आ रही पहली फ़िल्में पिटने लगी थीं, जो केवल पाँच करोड़ कमाकर गईं थीं. इस बीच हनुमान अंश जैसी फ़िल्में आईं, जिससे नई शुरुआत और नई कमाई की राह पर उम्मीद दिखी और इसने दूसरी लहर का रास्ता साफ़ कर दिया. दूसरी लहर में आ रही 27 फ़िल्में सिर्फ़ दो साल की बात नहीं करें. लेखक-निर्देशक विशाल चतुर्वेदी और मुख्य अभिनेता परविंदर झोटा, दोनों ही इस ट्रेंड के हिस्से हैं. वे अपनी ही इस फिल्म की बड़ी सफलता के बारे में बताते हैं कि कैसे मुँहज़बानी प्रचार की लहर ने उनके लिए सुख और मुनाफ़ा, राजस्थान तथा दिल्ली में दर्शकों की लाइनें खड़ी कर दीं. ऐसे ही दर्शकों की बढ़ती और लम्बी उम्मीदें ही हैं कि फ़िल्म के बारे में उठती हर आवाज़, दर्शकों ने ट्रेंड को किया. दूसरी लहर में हनुमान अंश ने अपने समय की बड़ी सफ़लताओं में शुमार की. महज 1.7 करोड़ रु. के मामूली बजट में बनी फ़िल्म रिलीज़ के दो महीने बाद भी सिनेमाघरों से उतर नहीं रही है और अब तक 400 करोड़ रु. से ज़्यादा कमा चुकी है. इस साल की यह एक बड़ी सफलता बॉक्स ऑफिस रिपोर्ट के मुताबिक़ 2 करोड़ की इस रिकॉर्ड दर्शक संख्या ने हनुमान अंश को एक सांस्कृतिक परिघटना बना दिया है. सिनेमाघरों में दर्शकों के जूते-चप्पल उतारकर बैठने का ट्रेंड भी इसी आवरण कथा का हिस्सा है.
गेटवे देश के विकास का
जब मुंबई में 9 और 10 अक्तूबर को करीब एक दशक में इन तारीखों में सबसे ज्यादा गर्मी पड़ रही थी तो देश की नजरें दिल्ली में जारी विरोध-प्रदर्शनों पर टिकी थीं जिनमें मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग हो रही थी. यह मसला मुंबई में आयोजित इंडिया टुडे कॉन्क्लेव में भी प्रमुखता से उठा. इसमें राजनीति, कारोबार, रक्षा, मनोरंजन, विज्ञान और संस्कृति समेत विभिन्न क्षेत्रों की करीब 70 हस्तियों ने अहम और समसामयिक मुद्दों पर चर्चा की. महा इंडिया के लिए महा मॉडल सत्र में महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने विपक्ष में सियासी खालीपन का फायदा उठाने के लिए कॉकरोच जनता पार्टी पर निशाना साधा और इससे इनकार किया कि जनता का रुझान भाजपा के खिलाफ हो रहा है. वैसे, चुनाव आयोग का मुद्दा छाया रहा. केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने तर्क दिया, "हम चुनाव आयोग में बैठे लोगों का बचाव नहीं कर रहे. हम संस्था का बचाव कर रहे हैं." तो कांग्रेस महासचिव सचिन पायलट ने सीईसी के इस्तीफे की मांग पर विरोध-प्रदर्शन जारी रखने का संकल्प जताया. पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त ओ.पी. रावत और पूर्व चुनाव आयुक्त अशोक लवासा ने विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया पर सवाल उठाए, उन्होंने प्रक्रिया में अनियमितताओं और ऐसे पात्र लोगों को लेकर चिंता जताई, जिनके नाम मतदाता सूची से हटाए जाने के खिलाफ अपीलों पर फैसला नहीं हुआ है. एनसीपी (एसपी) की कार्यकारी अध्यक्ष सुप्रिया सुले ने व्यापक चुनाव सुधारों की मांग की और भाजपा के साथ गठबंधन की अटकलों को खारिज किया.आर्थिक रोडमैप पर हुए सत्र में जे.पी. मॉर्गन के चीफ इंडिया इकोनॉमिस्ट साजिद जेड. चिनॉय ने आगाह किया कि पूंजी पर ज्यादा निर्भर होती भारत की आर्थिक वृद्धि रोजगार सृजन की संभावनाओं को सीमित कर रही है. एसबीआई ग्रुप के चीफ इकोनॉमिक एडवाइजर सौम्य कांति घोष ने डेटा सेंटरों, नवीकरणीय ऊर्जा और स्वास्थ्य सेवाओं में निवेश को रेखांकित किया. इकोनॉमिस्ट अजीत रानाडे ने आगाह किया कि तेज आर्थिक वृद्धि के साथ असमानता भी बढ़ रही है. नीति आयोग के पूर्व सदस्य डॉ. वी.के. सारस्वत ने स्वदेशी तकनीक और मिसाइल रक्षा को रणनीतिक जरूरत बताया. वहीं, पश्चिमी नौसेना कमान के फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ वाइस एडमिरल संजय वात्स्यायन ने समुद्री तैयारियों और भौगोलिक स्थिति के बढ़ते सामरिक इस्तेमाल पर चर्चा की.अगले पन्नों पर कॉन्क्लेव की कुछ प्रमुख बातों को पेश किया जा रहा है. —एम.जी. अरुण