July 29, 2026
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योगी की भगवा परिक्रमा
यह कोई ऐसी ऐसी जगह नहीं जहां मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पहले न गए हों, बल्कि आठ जुलाई से शुरू हुई दो दिवसीय चित्रकूट यात्रा उनके कार्यभार संभालने के बाद से 15वीं यात्रा थी. लेकिन सात वर्ष बाद यह पहला मौका था जब उन्होंने रात यहीं पर बिताई, और प्रशासनिक तथा धार्मिक दोनों ही तरह की गतिविधियां एकदम चरम पर रहीं. 124 विकास परियोजनाओं का शिलान्यास, कौशांबी के साथ जिले की सीमा पर यमुना नदी पर बने पुल का उद्घाटन, एक रक्षा कॉरिडोर और
युवा उद्यमियों को वित्तीय सहायता. फिर कामदगिरि पहाड़ी की परिक्रमा की. और एक भाषण भी दिया, जिसमें उन्होंने अपने चिर-परिचित अंदाज में शासन की बात करने के साथ कड़ा राजनैतिक संदेश भी दिया.
योगी के लिए इनमें कुछ भी नया नहीं, जो आक्रामकता दिखाने में कभी पीछे नहीं रहते, मगर उनके लहजे में एक अलग-सा तीखापन दिखा. अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावा चोरी की घटना के कारण सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) अब तक की सबसे कड़ी चुनौतियों में से एक से जूझ रही है. यह विवाद ऐसा है जो उसकी पूरी राजनीति की सबसे मजबूत कड़ी यानी आम हिंदू की आस्था को कमजोर कर सकता है. यही वजह है, इस बार जैसी मुश्किल पार्टी ने पहले कभी नहीं झेली. भगवा खेमे में योगी आदित्यनाथ ही सबसे पहले खुलकर इस चुनौती का सामना करने के लिए आगे आए हैं.
आगे की लड़ाई
इस जल्दबाजी की एक बड़ी वजह यह भी है कि उनके राज्य में चुनावी माहौल बनने लगा है. फरवरी 2027 में अब सिर्फ छह महीने बचे हैं. ऐसे में धर्म और आस्था की बातें करके भ्रमित जनता को फिर से साधना बहुत जरूरी था. चूंकि समाजवादी पार्टी (सपा) ने अयोध्या विवाद को हवा दी थी, ऐसे में योगी के लिए अपने सबसे बड़े विरोधी के खिलाफ कड़ा मोर्चा खोलने की जरूरत थी. वे नहीं चाहते कि जो लोग असमंजस में हैं वे सपा के पाले में जाएं, इसीलिए आठ जुलाई को चित्रकूट इंटर कॉलेज में अपने भाषण के दौरान विरोधियों पर जमकर निशाना साधा. योगी ने कहा, "हमारी सरकार तुलसीदास जी के जन्मस्थान, वाल्मीकि आश्रम के विकास और चित्रकूट में मंदाकिनी नदी के घाटों को सुंदर बनाने पर पैसा खर्च कर रही है, जबकि सपा सरकार जनता का पैसा कब्रिस्तानों की चारदीवारी बनवाने में खर्च करती थी"
चित्रकूट को रामायण में भगवान राम के
सतलज क्या है पूरा सच
जब मोदी सरकार ने आदेश दिया कि तीन जुलाई को रिलीज होने के बमुश्किल दो दिन बाद ही दिलजीत दोसांझ हनी त्रेहन की फिल्म सतलज को जी5 से हटा दिया जाए, तो इसकी आधिकारिक वजह पंजाब में सुरक्षा संकट टालने को बताया गया. लेकिन इस प्रतिबंध का उलटा असर हुआ. जो फिल्म एक भी सिनेमाघर के परदे पर नहीं दिखाई गई थी, वह पंजाब से निकले एक सिनेमा की हाल के वर्षों में सबसे ज्यादा देखी गई कृति बन गई. सिर्फ विवाद के दम पर वह ब्लॉकबस्टर दर्जे तक पहुंच गई. भारत में ब्लॉक होने के बाद भी यह विदेशों में प्लेटफॉर्म पर कई और दिनों तक उपलब्ध रही, और प्रवासी समुदाय ने इसे उतनी ही शिद्दत से देखा, जितनी पंजाब ने. राज्य के भीतर गुरुद्वारों में सामुदायिक स्क्रीनिंग में खचाखच भीड़ जुटी, जहां काले दशक के सफेद होते बालों वाले बचे हुए लोग उस जेन जी के साथ बैठे दिखे, जो उस दौर को सिर्फ पारिवारिक यादों से जानती है. दोनों की आंखें नम थीं.