indiatoday-hindi Thank You! Redirecting Now
  • Search@2x
May 13, 2026

मिथॉस का खतरा

अलिफ लैला (अरबियन नाइट्स) की एक पुरानी कहानी में गरीब मछुआरा एक जि9न को कैद से आजाद करता है लेकिन बाद में वही जि9न उसके लिए खतरा बन जाता है. कुछ ऐसा ही खतरा समझते हुए डैरियो अमोडेई ने सावधानी बरती. उनकी कंपनी एंथ्रोपिक ने ॠलॉड फैमिली के अपने सबसे नए और ताकतवर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआइ) मॉडल मिथॉस को सार्वजनिक रूप से जारी नहीं किया. वजह साफ थी: यह मॉडल खुला छोड़ने के लिए बहुत यादा शक्तिशाली माना गया. एंथ्रोपिक ने खुद माना कि इस मॉडल की क्षमता अब तक ट्रेन किए गए किसी भी मॉडल से काफी आगे है. सिर्फ यही बात सुर्खियां बनने के लिए काफी थी. लेकिन दुनिया भर में असली चिंता इस बात से बढ़ी कि मिथॉस को किस काम के लिए तैयार किया गया है? एजेंटिक एआइ के दौर में, खासकर कोडिंग से जुड़े कामों के बीच विकसित होकर, यह एक तरह के फ्रेंके9स्टाइन जैसे सिस्टम में बदल गया है, जिसकी नजर सॉफ्टवेयर की कमजोरियों पर बेहद पैनी हैयहां तक कि जीरो-डे जैसी अनजान खामियां भी, जिनक

चेतावनी भारतीय प्रतिरक्षा तंत्र के लिए

मिथॉस जैसे एआइ मॉडल से पैदा हो रहे खतरे से निबटने का एकमाला रास्ता मजबूत, स्वदेशी एआइ ढांचा तैयार करना है. भारत की रक्षा व्यवस्था सॉफ्टवेयर आधारित कम्युनिकेशन सिस्टम, सैटेलाइट नेटवर्क, रडार इंस्टॉलेशन, एयर डिफेंस सिस्टम और लॉजिस्टिक्स चेन के जाल पर टिकी है. एंथ्रोपिक के क्लॉड मिथॉस जैसे उ9नत एआइ मॉडल इस व्यवस्था के लिए एक नए तरह का जोखिम लेकर आए हैं. विशेष#ाों का मानना है कि अगर ऐसे एआइ सिस्टम गलत हाथों में पड़ जाएं, तो वे सै9य स्तर के सॉफ्टवेयर को स्कैन कर छिपी या अब तक अनजान कमजोरियों को बहुत कम लागत में खोज सकते हैं. पारंपरिक साइबर खतरों के विपरीत, जो मानव विशेष#ाता और समय पर निर्भर होते हैं, ऐसे एआइ सिस्टम बड़े पैमाने पर कमजोरियां ढूंढ़ने और उनका फायदा उठाने की प्रक्रिया को ऑटोमेट कर सकते हैं, जिससे प्रतिक्रिया का समय बहुत कम हो जाता है. सबसे खराब स्थिति में, दुश्मन रक्षा नेटवर्क में ’ाुसपैठ कर सकते हैं, सैटेलाइट कम्युनिकेशन को बाधित कर सकते हैं, सैनिकों की आवाजाही और संसाधनों की तैनाती के लिए जरूरी लॉजिस्टिक्स चेन को तोड़ सकते हैं, और रडार तथा एअर डिफेंस सिस्टम की विश्वसनीयता से समझौता कर सकते हैं. यह सब ऑपरेशनल तैयारियों को कमजोर कर सकता है और युद्ध की स्थिति में बेहद खतरनाक साबित हो सकता है. ऐसे उ9नत एआइ को आक्रामक साइबर ऑपरेशन में शामिल करना भारत की र!ानीतिक रक्षा तैयारी के तरीके में बुनियादी बदलाव की मांग करता है. जयजीत भट्टाचार्य कहते हैं कि मिथॉस जैसे मॉडल का सबसे बड़ा खतरा यह है कि कमजोरियों की पहचान और उनके इस्तेमाल के बीच का समय बहुत कम हो गया है, और ये सिस्टम साइबर सुरक्षा उपायों के उ9हें ठीक करने से पहले ही खामियां खोज सकते हैं. वे कहते हैं कि ऐसे एआइ के कथित चीनी संस्कर!ा भारत के विरोधियों तक पहुंच सकते हैं, जो जुड़े हुए सॉफ्टवेयर सिस्टम पर आधारित रक्षा, टेलीकॉम और ऊर्जा ढांचे के लिए गंभीर खतरा बन सकते हैं. भट्टाचार्य कहते हैं, जो तकनीक सुरक्षा करने वालों को कमजोरियां पहचानने और उ9हें ठीक करने में मदद कर सकती है, वही दुश्मनों को हमले करने में भी मदद कर सकती है. भारत को नियंलिात पहुंच वाला ढांचा बनाना होगा, रक्षा और अहम इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए एआइ-रेड टीम टेस्टिंग अनिवार्य करनी होगी, स्वदेशी साइबर- एआइ क्षमता विकसित करनी होगी और इलेक्ट्रॉनिक्स और इ9फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी मंलाालय, सीईआरटी-इन (इंडियन कंफ्यूटर इमरजेंसी रेस्पॉ9स टीम), रक्षा मंलाालय, डीआरडीओ (रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन) एनटीआरओ (नेशनल टेक्निकल रिसर्च आर्गेनाइजेशन) तथा दूसरे रेगुलेटरों के बीच बेहतर तालमेल बनाना होगा. मनोहर पर्रीकर इंस्टीट्यूट फॉर डिफेंस स्टडीज ऐंड एनालिसिस में शोध विश्लेषक रोहित कुमार शर्मा कहते हैं कि मिथॉस का मूल उद्देश्य सिस्टम को सुरक्षित करना है, इसलिए यह सही इस्तेमाल में फायदेमंद हो सकता है. लेकिन अगर यह गलत हाथों में चला जाए तो खतरा बन सकता है. वे यह भी मानते हैं कि मिथॉस को लेकर जो डर बना है, वह एआइ आधारित साइबर हथियारों की नई दौड़ की शुरुआत कर सकता है. पेलोरस टेक्नोलॉजी के संस्थापक और सीईओ राहुल द्विवेदी कहते हैं कि मिथॉस जैसी उपल्ब्रिरध एक खतरनाक सचाई भारत का डिजिटल ढांचा, जो अमेरिकी सॉफ्टवेयर और चीनी हार्डवेयर पर निर्भर है, इन नए, तेज एआइ हमलों के सामने खासतौर पर जोखिम में.

magzine
Previous Editions

Copyright © 2026 Living Media India Limited.For reprint rights: Syndication Today.